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हॉक की उड़ान, दिलों में अरमान, आसमान में तिरंगा बना तो गूंजा जय हिंदुस्तान

मेरठ

रविवार की सुबह लगभग साढे़ बजे आसमान में सबसे पहले विमानों की गूंजती गर्जना सुनाई दी… फिर देखते ही देखते नौ विमान एक साथ नजर आए और हजारों निगाहें वहीं ठहर गईं। पलक झपकते विमान नीचे आए, तेजी से पलटे और फिर आसमान की ऊंचाई में पहुंच गए। कुछ क्षण बाद धुएं की लकीरों ने आसमान पर तिरंगा उकेर दिया। करीब 100 फीट की ऊंचाई पर विमानों ने दिल की आकृति बनाई तो न्यू इंटीग्रेटेड टाउनशिप तालियों और जय हिंद के नारों से गूंज उठी। भारतीय वायुसेना की सूर्यकिरण एयरोबेटिक टीम के एयर शो का रविवार को दूसरा दिन था। सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित एयर शो ने प्रदेश में युवाओं को राष्ट्रनिर्माण, अनुशासन और विकसित भारत के संकल्प से जोड़ने की योगी सरकार की पहल को भी नई ऊर्जा दी। करतबों के बीच मैदान लगातार तालियों और ‘भारत माता की जय’, ‘जय हिंद’ के नारों से गूंजता रहा।

पांच मीटर के फासले पर क्रास हुए विमान

सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित एयर शो के दूसरे दिन शनिवार की तुलना में कई गुना अधिक भीड़ थी। वायुसेना ने लगभग 30 मिनट तक रोमांच और शौर्य से भरा हवाई प्रदर्शन किया। हर करतब के साथ भारत माता की जय और जय हिंद के नारे वातावरण में गूंजते रहे। हिंडन एयरबेस से उड़ान भरकर आए हॉक एमके-132 विमानों ने ऐसा तालमेल दिखाया कि दर्शकों की आंखें कुछ देर के लिए जैसे आसमान पर जम गईं। कई बार दो विमान एक-दूसरे से बेहद कम दूरी पर साथ उड़ते दिखाई दिए। कभी विमान तेजी से नीचे आते और उसी रफ्तार में ऊपर उठ जाते तो कभी दो विमान आमने-सामने से क्रास होते हुए नजर आए। यह दृश्य आते ही मैदान में मौजूद लोगों के मुंह से अनायास चीख निकल गई और अगले ही पल तालियों की गड़गड़ाहट सुनाई देने लगी।

बच्चों और युवाओं में एयर शो का अलग ही उत्साह दिखाई दिया। कोई हाथ से विमानों की दिशा बताता रहा तो कोई मोबाइल कैमरा आसमान की ओर किए रहा। बच्चों ने कहा कि विमान इतनी तेजी से कलाबाजी कर रहे थे कि आंखें हटाने का मन ही नहीं हुआ। कई बच्चों ने इसे पहली बार प्रत्यक्ष देखा और कहा कि प्रदर्शन ने उन्हें वायुसेना के बारे में जानने तथा देश के लिए कुछ करने की प्रेरणा दी।

तीन दशक से शौर्य दिखा रही सूर्यकिरण: रक्षा राज्य मंत्री
दूसरे दिन एयरशो कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ रहे। उन्होंने कहा कि सूर्यकिरण एयरोबेटिक टीम करीब 30 वर्षों से देश-दुनिया के अलग-अलग स्थानों पर अपने प्रदर्शन से भारतीय वायुसेना की क्षमता का परिचय दे रही है। उन्होंने कहा कि आसमान में दिखने वाला यह प्रदर्शन केवल रोमांच नहीं, बल्कि साहस, पराक्रम, धैर्य और अनुशासन का परिचय है। ऐसे आयोजन युवाओं को सेना और वायुसेना से जुड़कर राष्ट्रसेवा करने के लिए प्रेरित करते हैं।

राज्यसभा सांसद डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने कहा कि मेरठ में सूर्यकिरण का प्रदर्शन युवाओं के लिए उत्साह बढ़ाने वाला अवसर रहा। उन्होंने कहा कि सेना के जवान कठिनतम परिस्थितियों में देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं और वायुसेना के पायलट आसमान में जिस कौशल का प्रदर्शन करते हैं, उससे भारतीय सैन्य शक्ति का एक अलग आयाम सामने आता है। इस तरह के कार्यक्रम युवाओं को सेना में जाने के लिए प्रेरणा देते हैं।

राज्य मंत्री डा. सोमेंद्र तोमर ने कहा कि सेना प्रत्येक भारतीय के लिए सम्मान का विषय है। मेरठ क्रांति की धरती है और यहां सेना के प्रति लोगों का जुड़ाव हमेशा दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि युवा देश का भविष्य हैं और विकसित भारत के निर्माण में उनकी भागीदारी महत्वपूर्ण है।
इस दौरान विधानपरिषद सदस्य धर्मेंद्र भारद्वाज, विधानपरिषद सदस्य अश्वनी त्यागी, डीआईजी कलानिधि नैथानी, जिलाधिकारी डॉ़ वीके सिंह, सीडीओ नुपूर गोयल, एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति, एडीएम सिटी ब्रजेश कुमार, जिला सूचना अधिकारी सुमित कुमार समेत अन्य विभागों के अधिकारी और कर्मचारी तथा भारी संख्या में आम जनमानस  मौजूद रहे।

दूसरे दिन भी मेरठ के तीन पायलटों का जलवा

सूर्यकिरण के इस प्रदर्शन में मेरठ से जुड़े तीन पायलटों की भी भूमिका रही। स्क्वाड्रन लीडर अमन गोयल और स्क्वाड्रन लीडर राहुल सिंह ने विमानों को उड़ाया, जबकि स्क्वाड्रन लीडर शरद गोयल ने जमीन से प्रदर्शन के संचालन की कमान संभाली। स्थानीय पायलटों की मौजूदगी की जानकारी मिलते ही दर्शकों का उत्साह और बढ़ गया।

रास्ते में रुककर भी देखा शो, बाद में दो किमी तक जाम

एयर शो देखने के लिए सुबह से ही शहर और आसपास के क्षेत्रों से लोगों का पहुंचना शुरू हो गया था। परिवारों के साथ बड़ी संख्या में बच्चे और युवा पहुंचे। प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात के लिए अतिरिक्त पुलिस बल लगाया था। इसके बावजूद कार्यक्रम खत्म होने के बाद वाहनों का दबाव अचानक बढ़ गया। आसपास की सड़कों पर करीब दो किलोमीटर तक वाहनों की कतार लग गई। कई लोग कार्यक्रम स्थल तक पहुंच ही नहीं सके और रास्ते में खड़े होकर आसमान में करतब देखते रहे। शो की यादें मोबाइल में कैद कर लौट रहे लोगों की राह कुछ पल के जाम ने जरूर रोक दी, लेकिन चेहरों पर एयर शो का रोमांच देर तक बना रहा।

हर उम्र के चेहरे पर दिखाई दिया रोमांच

हर उम्र के लोगों पर एयर शो का रोमांच दिखाई दिया। सबसे ज्यादा बच्चे रोमांचित नजर आए। विमान की गर्जना सुनते ही बच्चे आसमान की ओर उंगली उठाकर एक-दूसरे को विमान दिखाते रहे। जैसे ही दो विमान बेहद कम दूरी से आमने-सामने क्रास हुए, कई बच्चों के मुंह से एक साथ ‘ओह…’ निकल पड़ा। अगले ही पल तालियों की गड़गड़ाहट सुनाई देने लगी। छात्र अविरल ने उत्साहित होकर कहा, जब दोनों विमान एक-दूसरे की तरफ आए तो लगा अब क्या होगा, लेकिन पायलट ने इतनी तेजी से विमान मोड़ा कि हम देखते ही रह गए।

छात्रा अनन्या ने कहा, मैं एक भी करतब मिस नहीं करना चाहती थी। विमान आते ही मोबाइल ऊपर कर देती थी। जब तिरंगा बना तो सच में बहुत अच्छा लगा, उस समय वीडियो बनाना भी भूल गई और बस आसमान देखती रह गई। सौरभ ने कहा, पहले विमान सिर्फ टीवी और वीडियो में देखे थे, लेकिन आज सामने से इतनी ऊंचाई पर उड़ते देखा तो लगा जैसे कोई फिल्म चल रही हो। सबसे ज्यादा मजा तब आया जब सारे विमान एक साथ घूमे।

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