योगी सरकार में खनन विभाग की बड़ी उपलब्धि, 30 हजार करोड़ से अधिक राजस्व

लखनऊ
भ्रष्टाचार के खिलाफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 'जीरो टॉलरेंस' नीति, अत्याधुनिक तकनीक के उपयोग और पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था से उत्तर प्रदेश का खजाना तेजी से समृद्ध हो रहा है। कभी भ्रष्टाचार और अवैध खनन के लिए चर्चित रहने वाला प्रदेश का भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग आज सुशासन का मॉडल बनकर उभरा है। योगी सरकार के बीते 9 वर्षों (2017 से 2026) के दौरान विभाग ने ₹30,524 करोड़ से अधिक का ऐतिहासिक खनन राजस्व प्राप्त किया है। यह पूर्ववर्ती सपा सरकार (2012-2017) के 5 वर्षों में मिले महज ₹4,700 करोड़ के राजस्व की तुलना में कई गुना अधिक है।
उत्तर प्रदेश भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग की सचिव एवं निदेशक माला श्रीवास्तव ने बताया कि यह रिकॉर्ड राजस्व वृद्धि अवैध खनन पर कसते शिकंजे, पारदर्शी ई-नीलामी प्रक्रिया, डिजिटल ई-सेवाओं के विस्तार और अत्याधुनिक सर्विलांस सिस्टम की बदौलत संभव हो सकी है।
सपा सरकार के मुकाबले राजस्व में रिकॉर्ड उछाल
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2012 से 2017 के दौरान सपा शासनकाल में राज्य को खनन से कुल ₹4,700 करोड़ का राजस्व ही मिल सका था। वहीं, वर्ष 2017 से 2026 के बीच योगी सरकार की पारदर्शी नीतियों के चलते यह बढ़कर ₹30,524 करोड़ के आंकड़े को पार कर गया। अवैध खनन पर नकेल कसने और प्रक्रिया को ऑनलाइन करने से लीकेज पूरी तरह बंद हुआ, जिसका सीधा लाभ सरकारी खजाने को मिला।
गूगल अर्थ व PGRS लैब से 66 अवैध खनन स्थलों पर कार्रवाई
अवैध खनन पर नकेल कसने के लिए निदेशालय में पॉइंट वाइज ग्राउंड रिस्पॉन्स सिस्टम (PGRS) प्रयोगशाला स्थापित की गई। गूगल अर्थ सैटेलाइट इमेजिंग और एआई (AI) की मदद से प्रदेश भर में 66 अवैध खनन क्षेत्रों की सटीक पहचान कर तुरंत कार्रवाई की गई, जिससे माफिया नेटवर्क ध्वस्त हुआ और ₹2.19 करोड़ से अधिक की जुर्माना राशि व राजस्व वसूला गया।
पारदर्शी ई-नीलामी और 'यूपी माइन मित्र' पोर्टल
वित्तीय वर्ष 2022-23 से अब तक प्रमुख खनिजों के 10 ब्लॉकों के 'कंपोजिट लाइसेंस' और 3 ब्लॉकों के 'खनन पट्टों' की शत-प्रतिशत पारदर्शी ई-नीलामी की गई। इसके अतिरिक्त 'यूपी माइन मित्र' (UP Mine Mitra) पोर्टल के जरिए 10 से अधिक नागरिक व व्यावसायिक सेवाएं ऑनलाइन की गईं, जिससे भ्रष्टाचार और बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो गई।
आईएमएसएस (IMSS) और एआई चेकगेट से अवैध परिवहन पर ब्रेक
अवैध खनन और ओवरलोडिंग को रोकने के लिए इंटीग्रेटेड माइनिंग सर्विलांस सिस्टम (IMSS) लागू किया गया। इसके तहत खनन पट्टों की जियो-फेंसिंग, वाहनों में जीपीएस/वीटीएस (VTS) ट्रैकिंग, आरएफआईडी (RFID) टैग और आईओटी (IoT) आधारित स्वचालित चेकगेट स्थापित किए गए हैं।
पर्यावरण संरक्षण हेतु 'एम-सैंड नीति-2024'
नदियों के प्राकृतिक संसाधनों को बचाने के लिए राज्य सरकार ने 'एम-सैंड (M-Sand) नीति-2024' लागू की। इससे प्राकृतिक बालू के स्थान पर निर्मित बालू को बढ़ावा मिला है, जिससे निर्माण कार्यों के लिए सस्ती सामग्री उपलब्ध हो रही है और अवैध बालू खनन पर रोक लगी है।





