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IPS तरुण गाबा बने लखनऊ के नए पुलिस कमिश्नर, फील्ड पोस्टिंग का अनुभव कानून-व्यवस्था में आएगा काम

 लखनऊ
 उत्तर प्रदेश कैडर के 2001 बैच के आईपीएस अधिकारी तरुण गाबा ने बुधवार को लखनऊ के पांचवें पुलिस कमिश्नर के रुप में अपना कार्यभार ग्रहण किया। अपर पुलिस महानिदेशक सुरक्षा के पद पर कार्यरत रहे गाबा को मंगलवार को हुए आईपीएस ट्रांसफर में लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट में पुलिस कमिश्नर की जिम्मेदारी दे दी।

तरुण गाबा को योगी आदित्यनाथ सरकार के पसंदीदा पुलिस अधिकारियों में गिना जाता है। प्रयागराज पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम लागू होने के बाद 22 जून 2024 को तरुण गाबा वहां के दूसरे पुलिस कमिश्नर बने थे। लखनऊ रेंज में भी वे अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

दूसरी बार उन्हें लखनऊ रेंज के पुलिस कमिश्नर पद पर बैठाया गया है। इस प्रकार 11 माह बाद एक बार फिर उनकी लखनऊ में वापसी हो गई है। तकनीकी दिमाग, पुलिसिंग की मजबूत पकड़ और शानदार ट्रैक रिकॉर्ड के साथ तरुण गाबा का लखनऊ पुलिस कमिश्नर बनना राजधानी की कानून-व्यवस्था के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।

लखनऊ के पांचवें पुलिस कमिश्नर 
गाबा से पहले सुजीत पाण्डेय 14 जनवरी 2020 से 18 नवंबर 2020 तक 309 दिन, ध्रुवकांत ठाकुर 18 नवंबर 2020 से एक अगस्त 2022 तक एक वर्ष 256 दिन, एसबी शिरोडकर एक अगस्त 2022 से 22 जून 2024 तक एक वर्ष 326 दिन और अमरेंद्र कुमार सेंगर 22 जून 2024 से 28 जुलाई 2026 तक लखनऊ के पुलिस कमिश्नर थे।

सुरक्षा व्यवस्था और पुलिसिंग के मोर्चे पर काबिलियत
सुरक्षा व्यवस्था और पुलिसिंग के मोर्चे पर उनकी काबिलियत है। जनवरी 2026 में एडीजी (ADG) रैंक पर प्रमोट हुए और इसके बाद वे एडीजी सुरक्षा' के पद पर तैनात थे। अब उन्हें प्रदेश की राजधानी की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी दी गई है। तरुण गाबा यूपी कैडर के 2001 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। तरुण गाबा इससे पहले प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर भी रहे थे। उन्होंने पीएसी, कारागार प्रशासन, एसएसएफ, सीबीआई और अन्य महत्वपूर्ण महकमों में अपनी सेवाएं दी हैं। उन्हें रिजल्ट देने वाले अधिकारी के तौर पर जाना जाता है। सीबीआई में तैनाती के साथ केंद्र में उन्होंने काफी समय तक काम किया। यूपी कैडर में वे वापस वर्ष 2020 में लौटे। सरकार ने क्राइम कंट्रोल के लिए वर्ष 2020 में तरुण गाबा को गृह सचिव बनाया था। उन्होंने एसके भगत का स्थान लिया था। इसके अलावा पांच जिलों में पुलिस प्रमुख का पद संभाल चुके हैं।

इंजीनियरिंग की डिग्री 
मूलत: चंडीगढ़ के निवासी तरुण गाबा आईपीएस तरुण गाबा ने B.E. (Electronics and Electrical Communication) में अपनी इंजीनियरिंग डिग्री पूरी की है। उनके पास MDPM (Police Management) और PG in Cyber Law की डिग्रियां हैं। साइबर क्राइम के इस दौर में उनकी यह तकनीकी समझ बेहद काम आने वाली है। 19 नवंबर 1976 को जन्मे तरुण गाबा मूल रूप से चंडीगढ़ के रहने वाले हैं। उनके पिता का नाम जीएल गाबा है। तरुण गाबा वर्ष 2019-20 में ह्यूबर्ट एचएच इंटरनेशनल फेलोशिप से सम्मानित हो चुके हैं। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (ISB) से वर्ष 2022-23 में Advance Management Programme in Public Policy का कोर्स भी किया है।

गैलंट्री से लेकर उत्कृष्ट सेवा पदक
तरुण गाबा को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं और वीरता के लिए कई राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है।
2008: राज्यपाल का 'गोल्ड मेडल फॉर गैलंट्री' (वीरता पुरस्कार)
2017: मेधावी सेवा के लिए 'प्रेसिडेंट पुलिस मेडल' (राष्ट्रपति पुलिस पदक)
2021 से 2023: डीजी की ओर से क्रमशः सिल्वर, गोल्ड और प्लेटिनम कमेंडेशन डिस्क
2024: उत्कृष्ट सेवा पदक
2025: मुख्यमंत्री महाकुंभ सेवा मेडल।

 

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