भोपालमध्य प्रदेश

MP में आदिवासी वोटबैंक पर फोकस: भाजपा का मालवा-निमाड़ में बड़ा अभियान

भोपाल

आदिवासी बहुल बड़वानी जिले के नागलवाड़ी में कैबिनेट की बैठक कर भाजपा ने यह संदेश दे दिया है कि वह आदिवासियों में पार्टी के आधार को और मजबूत करना चाहती है। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने मालवा- निमाड़ से इसकी शुरुआत कर यह भी बता दिया है कि इसके केंद्र में मालवा- निमाड़ अंचल रहेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कैबिनेट को मंत्रालय के बंद कमरों से निकालकर सीधे आदिवासी अंचल और खेतों के बीच ले जाकर यह स्पष्ट कर दिया है कि उसकी प्राथमिकता ग्रामीण और किसान मतदाता हैं। बैठक के अलावा आदिवासियों की आस्था के केंद्र भीलट देव मंदिर में कैबिनेट के सदस्यों द्वारा माथा टेकना इस समुदाय को भावनात्मक रूप से पार्टी से जोड़ने का प्रयास भी रहा।

बता दें, आदिवासी मतदाताओं के झुकाव से ही मध्य प्रदेश में सरकार बनती है। इन दिनों नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी आदिवासियों को साधने के लिए निरंतर प्रवास कर रहे हैं। मालवा-निमाड़ अंचल में कांग्रेस के 12, भाजपा के आठ और एक सीट पर भारतीय आदिवासी पार्टी (बीएपी) का विधायक है। इस संख्या को देखते हुए भी भाजपा को यहां विशेष प्रयास करने की आवश्यकता है।
मिशन-2028 की तैयारी 

भाजपा ने आगामी विधानसभा चुनाव यानी मिशन 2028 की तैयारी नागलवाड़ी में कैबिनेट कर आरंभ कर दी है। उसका पहला लक्ष्य आदिवासी वर्ग का भरोसा जीतना है। दरअसल, वर्ष 2013 तक भाजपा के पास प्रदेश की कुल 47 एसटी आरक्षित सीटों में से दो- तिहाई सीटें हुआ करती थी लेकिन वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा का जनाधार खिसक गया था। खासतौर से आदिवासी वर्ग ने भाजपा का साथ छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया था। इस कारण प्रदेश में कमल नाथ सरकार बन गई थी।

वर्ष 2018 में राज्य की 47 एसटी आरक्षित सीटों में से भाजपा केवल 16 सीटें जीत पाई थी, जबकि कांग्रेस ने 30 सीटों पर कब्जा किया था। वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव की तुलना में यह भाजपा के लिए 15 सीटों का बड़ा नुकसान था। हालांकि भाजपा को कुल वोट शेयर (41.6%) कांग्रेस (41.5%) से थोड़ा अधिक मिला था, लेकिन आदिवासी अंचल में सीटों के नुकसान ने उसे बहुमत से दूर कर दिया।

वर्ष 2018 के झटके के बाद भाजपा ने अपनी रणनीति बदली, जिसके परिणाम 2023 के चुनावों में दिखे। पार्टी ने एसटी सीटों पर अपनी संख्या 16 से बढ़ाकर 24 कर ली। यही कारण है कि नागलवाड़ी जैसी बैठकें केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि गहरी सुधारात्मक रणनीति का हिस्सा हैं।

'प्रयोगधर्मी' नेता की पहचान बना रहे डॉ. मोहन यादव

  • नागलवाड़ी में आयोजित बैठक को 'कृषि कैबिनेट' नाम भी दिया गया। इससे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की राजनीतिक छवि में सुधार और मजबूती आने की पूरी संभावना है। इसके पीछे कई रणनीतिक कारण हैं।
  • कैबिनेट को सुदूर गांव तक ले जाना डॉ. मोहन यादव को एक इनोवेटिव और 'आउट ऑफ द बॉक्स' सोचने वाले मुख्यमंत्री के रूप में स्थापित करता है। यह छवि उन्हें पिछली सरकारों के पारंपरिक ढर्रे से अलग करती है।
  • मुख्यमंत्री का आदिवासी अंचल में जाकर उन्हीं के बीच बैठना और भीलट देव जैसे स्थानीय लोक-देवताओं को सम्मान देना, उन्हें आदिवासियों के बीच 'अपना व्यक्ति' के रूप में प्रस्तुत करता है।
  • यह छवि 2018 के 'आदिवासी विरोधी यानी एंटी-ट्राइबल' नैरेटिव को काटने में मददगार होगी।
  • एक ही बैठक में 27,746 करोड़ रुपये के भारी-भरकम प्रस्तावों को मंजूरी देना उन्हें एक अच्छा प्रशासक के रूप में प्रस्तुत करता है। इससे यह संदेश जाता है कि वह केवल घोषणाएं नहीं करते, बल्कि बजट का प्रविधान भी साथ रखते हैं।
  • भाजपा की मौजूदा सक्रियता बताती है कि वह 21 प्रतिशत आदिवासी आबादी के महत्व को समझ चुकी है और इसे लेकर वर्ष 2028 में किसी भी प्रकार की जोखिम नहीं लेना चाहती।
  •  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button