UPI पर चार्ज लगा तो बदल जाएगा पेमेंट का तरीका? सर्वे में 76% यूजर्स ने दिए बड़े संकेत

नई दिल्ली
UPI से 2,000 रुपये से ज्यादा के पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट लगाने की तैयारी है। यह नियम 15 अक्टूबर से लागू हो सकता है। इसमें UPI P2P यानी ग्राहक से व्यापारी वाले भुगतान शामिल होंगे। यह चार्ज व्यापारी को देना है। लेकिन, सवाल यह है कि अगर व्यापारी या दुकानदार यह खर्च ग्राहकों पर डाल देते हैं, तो क्या होगा? लोकल सर्कल्स के नए सर्वे में इसका बड़ा असर दिख रहा है। सर्वे में 291 जिलों के 67,000 से ज्यादा UPI यूजर्स ने जवाब दिए।
ग्राहक क्या करेंगे अगर UPI पर फीस लगे?
सर्वे के मुताबिक, अगर व्यापारी UPI पेमेंट पर अलग से फीस जोड़ते हैं, तो…
14 प्रतिशत लोग कहते हैं वे UPI से ही पेमेंट करेंगे और फीस भी देंगे।
27 प्रतिशत लोग कैश से पेमेंट करेंगे।
26 प्रतिशत लोग क्रेडिट कार्ड पर शिफ्ट हो जाएंगे।
14 प्रतिशत लोग डेबिट कार्ड इस्तेमाल करेंगे।
4 प्रतिशत लोग बैंक ट्रांसफर, NEFT या IMPS चुनेंगे।
नौ प्रतिशत लोग व्यापारी से कोई और ऐसा पेमेंट ऑप्शन मांगेंगे जिस पर अलग चार्ज न हो।
2 प्रतिशत लोग खरीदारी टाल देंगे या करेंगे ही नहीं।
4 प्रतिशत लोग तय नहीं कर पाए कि वे क्या करेंगे।
₹2,000 से ऊपर की खरीद में कौन से पेमेंट मोड का करेंगे इस्तेमाल ?
जब लोगों से पूछा गया कि अगर UPI पर अलग चार्ज लगे तो ₹2,000 से ऊपर की खरीद में वे सबसे ज्यादा कौन सा तरीका इस्तेमाल करेंगे तो उनका जवाब कुछ ऐसा रहा..
26 प्रतिशत लोग क्रेडिट कार्ड चुनेंगे।
26 प्रतिशत लोग कैश चुनेंगे।
13 प्रतिशत लोग डेबिट कार्ड चुनेंगे।
11 प्रतिशत लोग बैंक ट्रांसफर, NEFT या IMPS चुनेंगे।
सिर्फ 20 प्रतिशत लोग UPI का इस्तेमाल करते रहेंगे।
4 प्रतिशत लोग अनिश्चित हैं।
यानी LocalCircles का मानना है कि 76 प्रतिशत UPI यूजर्स बड़े पेमेंट के लिए UPI छोड़ सकते हैं, अगर उस पर अतिरिक्त शुल्क लगता है।
क्या व्यापारी भी MDR नहीं देना चाहते?
सर्वे में व्यापारियों की राय भी सामने आई है। 242 जिलों के 32,000 से ज्यादा व्यापारियों ने ये जवाब दिए…
सिर्फ 17 प्रतिशत व्यापारी ₹2,000 से ऊपर के UPI पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत MDR देने को तैयार हैं।
41 प्रतिशत व्यापारी कोई भी MDR देने को तैयार नहीं हैं।
9 प्रतिशत व्यापारी UPI ही नहीं लेते।
15 प्रतिशत व्यापारियों ने 0.04 प्रतिशत को अधिकतम सीमा बताया।
UPI ट्रांजैक्शन वैल्यू 10 प्रतिशत क्यों गिर सकती है?
लोकल सर्कल्स का अनुमान है कि 15 अक्टूबर से 0.4 प्रतिशत MDR लागू होने के बाद पहले पूरे महीने में UPI ट्रांजैक्शन वैल्यू 10 प्रतिशत तक घट सकती है। दरअसल, ₹2,000 से ऊपर के UPI पेमेंट संख्या में बहुत कम हैं। मर्चेंट ट्रांजैक्शन वॉल्यूम का 5 प्रतिशत से भी कम, लेकिन वैल्यू के हिसाब से ये करीब 67 प्रतिशत हैं, यानी लगभग ₹6 लाख करोड़ महीना। यह कुल UPI ट्रांजैक्शन वैल्यू का करीब एक-पांचवां हिस्सा है।
अनुमान है कि UPI ट्रांजैक्शन वॉल्यूम 4 प्रतिशत गिर सकती है। इसमें 1 पर्सेंटेज पॉइंट सीधा नुकसान MSME व्यापारियों पर होगा और 3 पर्सेंटेज पॉइंट नेटवर्क इफेक्ट से, क्योंकि लोग उन व्यापारियों के साथ कुल UPI इस्तेमाल भी कम कर सकते हैं।
चूंकि 83 प्रतिशत व्यापारी 0.4 प्रतिशत MDR खुद नहीं झेलना चाहते, इसलिए हो सकता है कि वे यह खर्च सरचार्ज, प्रोडक्ट की कीमत बढ़ाकर, या ग्राहकों को दूसरे पेमेंट मोड की तरफ मोड़कर वसूल करें। अगर ऐसा हुआ, तो 76 प्रतिशत ग्राहक ₹2,000 से ऊपर की खरीद में दूसरा पेमेंट मोड चुन सकते हैं।





