भोपालमध्य प्रदेश

भोपाल मास्टर प्लान में ‘मार्केट स्ट्रीट’ का मास्टर स्ट्रोक, 80 से ज्यादा इलाकों पर असर

भोपाल
भोपाल में आवासीय में कारोबार की छूट के लिए मास्टर प्लान में मार्केट स्ट्रीट का मास्टर स्ट्रोक मारा गया है। जिन मुख्य मार्गों की चौड़ाई 18 मीटर या उससे अधिक है और जहां अवैध निर्माण के शमन से जुड़े अधिकांश मामले निपटाए जा चुके है, उन्हें राज्य सरकार विचार-विमर्श के बाद मार्केट स्ट्रीट घोषित कर सकती है। अरेरा कॉलोनी, अवधपुरी, गुलमोहर, शाहपुरा, कोलार, संतनगर, करोद समेत शहरभर में 80 से अधिक क्षेत्रों में इसका असर होगा। सरकार और संबंधित अफसर के विवेक पर छोड़ दिया गया है कि यदि इस चौड़ाई की सड़क किनारे कारोबार करने वाले कई घर हो गए हैं तो बचे हुए घरों को भी कारोबार की छूट दे दी जाए। मार्केट स्ट्रीट घोषित होने के बाद उन सड़कों पर स्थित आवासीय प्लॉटों पर व्यावसायिक गतिविधियां चलाने की कानूनी अनुमति होगी। यह छूट मुख्य सड़क से सटे मूल प्लॉट की गहराई तक ही मान्य रहेगी। सरकार ऐसी सड़कों को मार्केट स्ट्रीट के तौर पर अधिसूचित कर आगामी समय में कानूनी जामा पहना देगी।

ऐसे समझें स्थिति
मास्टर प्लान में इस प्रावधान को महज चार लाइन में लिखा गया। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ गवर्नेस एंड अर्बन मैनेजमेंट के पूर्व डायरेक्टर डॉ. एचएम मिश्रा के अनुसार मार्केट स्ट्रीट के प्रावधान स्पष्ट करने चाहिए, ताकि पता चले इसमें किस तरह की मंशा है। गौरतलब है कि आवासीय क्षेत्र में अवैध तौर पर संचालित दुकानों वाले क्षेत्र को अचानक पूरी तरह से मार्केट स्ट्रीट बनाया जाता है तो व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ेगी। गाड़ियों की आवाजाही बढ़ेगी, जाम और पार्किंग की दिक्कत के साथ इनके पास के आवासीय क्षेत्रों में लोगों की शांति भंग होगी। शोर-शराबा और भीड़भाड़ बढ़ेगी, जिससे वहां रह रहे वरिष्ठ नागरिकों और परिवारों की निजता प्रभावित होगी। इतना ही नहीं, पानी की खपत् बिजली की मांग और कचरा प्रबंधन पर दबाव बढ़ जाएगा। यहां जमीनों के दाम तो काफी बढ़ जाएंगे, लेकिन ठीक पीछे की गलियों में रहने वाले लोगों के लिए शांति और सुरक्षा की चुनौतियां बढ़ सकती हैं। बाजार इन गलियों से पीछे की अपेक्षाकृत कम चौड़ाई वाली गलियों में सहजता के साथ फैल जाएगा।

आपत्ति सुझाव 25 अक्टूबर तक कार्यालयों में नक्शे ही नहीं
मास्टर प्लान ड्राफ्ट 2047 पर 25 अक्टूबर तक आपत्ति सुझाव की समय सीमा है। लोग ड्राफ्ट, नक्शे, खसरे देखने टीएंडसीपी कार्यालय समेत कलेक्ट्रेट, संभागायुक्त कार्यालय पहुंच रहे। स्थिति ये है कि ड्राफ्ट जारी किए तीन दिन का समय बीत गया, अब तक टीएंडसीपी में खसरों के पैनल नहीं लगे हैं। सिर्फ दो नक्शे लगाए हुए है। इन्हें समझाने के लिए भी कोई व्यवस्था नहीं की। लोगों को सबसे अधिक आपत्ति ऑनलाइन सुनवाई को लेकर है। कोरोना के समय ऑनलाइन सुनवाई हुई थी, लेकिन अब ऐसी स्थिति नहीं है। ऑफलाइन सुनवाई में बेहतर बात रखी जा सकती है। टीएंडसीपी की वेबसाइट पर अलग से विंडो ओपन कर आपत्ति देने का प्रावधान किया जा रहा है।

गलियों में सड़कें छोटी की, ताकि निर्माण न टूटे
स्थानीय सड़कें जिन्हें मास्टर प्लान में सब सेक्टर रोड का नाम दिया, मौजूदा ड्राफ्ट में इन्हें 15 मीटर से 25 मीटर किया गया, जबकि पिछले प्लान में ये 12 मीटर से 18 मीटर थी। इसका असर ये कि सड़क चौड़ाई बढ़ाने में होने वाली तोड़फोड़ को पूरी तरह खत्म कर सड़क किनारे के व्यावसायिक निर्माणों को बचाया जा सके।

आर्किटेक्ट-प्लानर राजेश चौरसिया के अनुसार, मास्टर प्लान में बदलाव की जरूरत है। मिक्स्ड लैंडयूज होना चाहिए. लेकिन इसके लिए स्पष्ट तौर पर छोटे प्लॉट बनाने, अधोसंरचना से मजबूती से जुड़े प्रावधान करना जरूरी है। आवासीय और व्यवसायिक में किसी तरह का टकरान हो. इसपर योजना तय करना चाहिए।

ड्राफ्ट पर इनकी बात
बाघ भ्रमण क्षेत्र ग्राम बैरागढ़ व दौलतपुर की 425 हेक्टेयर भूमि राजस्व जंगल थी। पिछले साल ही इसे वन को ट्रांसफर की गई। चंदनपुरा में इसी तरह 357 हेक्टेयर जमीन मिलाकर 1200 एकड़ जमीन बनती है। ये पूरा बाघभ्रमण का क्षेत्र है, लेकिन यहां जिस तरह 60 मीटर 24 मीटर तक की सड़कें तय कर दी. उससे बाघ मानव संघर्ष का रास्ता खोल दिया है। मामले में मैंनें एनटीसीए को फोन पर व अब ईमेल से जानकारी दे रहा हूं।
-प्रभाष जेटली, एक्सपर्ट बाघ संरक्षण व पर्यावरण

पूरे ड्राफ्ट को पढ़कर सिर्फ इतना लग रहा है कि टीएंडसीपी के नियम कानून, प्रावधानों को मानने वाले पूरी तरह से ठगे गए हैं। जिन्होंने मनमर्जी की। तमाम तय नियम तोडे उन्हें इस ड्राफ्ट में उपकृत करने की कोशिश की है। आवासीय क्षेत्र की शांति के लिए कोई सौदा-समझौता कारोबार नहीं किया। 2005 में तय आवासीय क्षेत्र के रीडॅसिफिकेशन को तय कराने ये लेकर सड़कों की चौड़ाई कहीं घटाकर कहीं बढ़ाकर जो लाभदेने की मंशा स्पष्ट दिख रही है।- लवनीश भाटी, याचिकाकर्ता

मास्टर प्लान के इस ड्राफ्ट ने रहवासी क्षेत्रों के साथ शहर के पर्यावरण को भारी चोट पहुंचाई है। असीमित एफएआर का क्या मतलब होता है? किसी शहर को नियोजित करने वाला ड्राफ्ट तो नहीं लग रहा है। कर्नाटक सरकार ने भी ऐसा ही प्लान तैयार किया था, जिसके प्रावधानों को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज किया है। हम मॉनीटरिंग कर रहे हैं और ये मामला भी कोर्ट में मजबूती से रखेंगे। ग्रीन एरिया में अन्य गतिविधि तय की गई, स्पांज सिटी, रेंटल हाउसिंग जैसे शब्दों का उपयोग बता रहा है कि प्लानिंग में भोपाल से बाहर वालों की बड़ी भूमिका है।- पूर्णेदु शुक्ला, रहवासी

गुलमोहर कॉलोनी में नौ मीटर की रोड पर होटल्स खुल हैं। 1800 घरों की कॉलोनी है सब परेशान हो रहे हैं। आवासीय प्लॉट में अस्पताल है, घरों में होटल है, रेस्टोरेंट है। रोजाना पार्किंग और अन्य विवाद बन रहे। असामाजिक तत्वों की आवाजाही हो रही है। मास्टर प्लान में इन्हें रोकने के लिए कुछ नहीं किया। इन्हें नियमित करने के प्रावधान आवासीय में परेशानियां बढ़ाएंगे। 80 फीसदी या इससे चौड़ी सड़कों के किनारे प्रावधान करें तो ठीक होगा। अभी तो काफी गड़बड़ी प्लान है। सुधार होना चाहिए।- ललीत यावय, अध्यक्ष गुलमोहर समिति

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