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मैं बाल-बाल बचीं’: कास्टिंग काउच पर कृतिका कामरा का हैरान कर देने वाला खुलासा

मुंबई 
कृतिका कामरा ने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत एक टीवी शो से की थी. टीवी पर पॉपुलर होने के बाद, उन्होंने 2018 में फिल्मों में कदम रखा. लेकिन स्ट्रीमिंग शो 'तांडव' उनके करियर का गेम-चेंजर साबित हुआ. हालांकि यह इतना आसान नहीं था. फिल्मी परिवार का सपोर्ट न होना, यह एक ऐसी चीज है, जिससे इंडस्ट्री के बाहर से आए कई लोगों को जूझना पड़ता है. इसपर कृतिका कामरा ने खुलकर बात की है। 

कृतिका कामरा ने खुलासा किया कि अपने करियर के शुरुआती सालों में वह 'कास्टिंग काउच' से कैसे बचीं. एक्ट्रेस ने कहा, 'मैंने कास्टिंग काउच जैसी चीजों के बारे में सुना था. मेरे माता-पिता ने भी अखबारों में इसके बारे में पढ़ा था. मेरा भी इससे सामना हुआ था, लेकिन मैं बिना किसी नुकसान के बच निकली. यह बस किस्मत और इत्तेफाक था. ऐसा इसलिए नहीं हुआ कि मैं बहुत ज्यादा स्मार्ट थी. सच कहूं तो मैं स्मार्ट नहीं थी, क्योंकि जब मैंने शुरुआत की थी, तब मैं बहुत छोटी थी। 

हालांकि आज उन्होंने खुद को खासकर स्ट्रीमिंग की दुनिया में एक सफल एक्ट्रेस के तौर पर स्थापित कर लिया है, फिर भी कृतिका का कहना है कि उन्हें आज भी 'तरजीही बर्ताव' (preferential treatment) का सामना करना पड़ता है. उनका मानना ​​है कि इसका एक कारण उनका बैकग्राउंड और 'टीवी का टैग' भी हो सकता है. एक्ट्रेस ने कहा, 'मैंने इस तरह की ऊंच-नीच (hierarchy) का अनुभव किया है. मैं खुशी-खुशी टीवी पर काम कर रही थी, और मेरे मन में टीवी और फिल्मों के बीच कोई फर्क नहीं था। 

मुझे स्मार्ट नहीं समझते फिल्ममेकर्स- कृतिका
कृतिका के अनुसार, यह भेदभाव उन्हें 'सामंतवाद' (feudalism) जैसा लगता है. 'मैं एक छोटे शहर से आई थी, और मेरे लिए जो भी इंसान स्क्रीन पर दिखता था, वह एक एक्टर ही होता था. मुझे इस 'बिन-कही ऊंच-नीच' के बारे में कोई जानकारी नहीं थी, जो एक तरह से सामंतवाद जैसा ही है. मुझे इस बात का भी अंदाजा नहीं था कि स्क्रीन पर दिखने और निभाए गए किरदारों के आधार पर लोगों के बारे में कैसी राय बना ली जाती है। 

जब एक्ट्रेस से पूछा गया कि क्या फिल्ममेकर्स पहले और कभी-कभी आज भी उन्हें जज करते हैं? इस पर एक्ट्रेस ने कहा,'मुझे लगता है कि जब लोग मुझसे बात करते हैं, या जब उन्हें पता चलता है कि एक्टिंग के अलावा भी मुझे दूसरी चीजों की जानकारी है, तो उनके चेहरे पर हैरानी का एक हल्का सा भाव जरूर होता है. मैं यह तो नहीं कहूंगी कि यह उनकी तरफ से कोई 'जजमेंटल' रवैया है, लेकिन मुझे लगता है कि एक्टर्स के साथ अक्सर ऐसा होता ही है। 

'मुझे लगता है कि वे मुझे ऐसा इंसान समझते हैं जो स्मार्ट नहीं है. किसी ने सीधे शब्दों में ऐसा नहीं कहा, लेकिन मुझे यही समझ आया. असल में, जब उन्हें लगा कि मैं स्मार्ट नहीं हूं, तो यह मेरे लिए एक अजीब सी तारीफ थी. अब जैसे-जैसे वह इन सब चीजों से गुज़र रही हैं, उनके लिए एक बात जिस पर कोई समझौता नहीं हो सकता, वह है 'मजबूत इरादों वाली महिलाओं' का किरदार निभाना। 

एक्ट्रेस ने कहा, 'मैं एक फेमिनिस्ट हूं. मैं यह गर्व से कहती हूं. मुझे इस बात की परवाह है कि स्क्रीन पर महिला किरदारों को कैसे दिखाया जाता है. यहां तक कि TV पर भी, मैं किचन ड्रामा या ऐसे शो से दूर रही, जिनमें कुछ दकियानूसी सोच वाली चीजों को बढ़ावा दिया जाता था. मैंने ज्यादातर प्रगतिशील चीजें करने की कोशिश की. यह कुछ ऐसा था, जिसका फैसला मैंने अपनी जिंदगी में बहुत पहले ही कर लिया था. फिल्में और वेब शो करते समय भी मैं इस बात का पूरा ध्यान रखती हूं। 

अंत में कृतिका ने कहा, 'अपनी पहली फिल्म 'मित्रों' में भी, मैं कोई बेचारी लड़की नहीं थी. मैं एक मजबूत इरादों वाली हीरोइन थी. लेकिन उसके बाद, मुझे आमतौर पर ऐसी कुछ फिल्में ऑफर हुईं, जिनमें मेरे सिर्फ दो सीन और एक गाना था. मैंने उन फिल्मों के लिए मना कर दिया. मैं किसी बड़ी फिल्म का हिस्सा बनने के लिए कुछ भी करने को तैयार नहीं हूं। 

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