भोपालमध्य प्रदेश

64% महंगाई भत्ते का मार्च तक का प्लान फंसा, वित्त विभाग के प्रस्ताव पर अब एक्शन नहीं, 12 लाख कर्मचारियों को करना पड़ेगा इंतजार

भोपाल 

 मध्य प्रदेश में महंगाई भत्ते (DA) को लेकर वित्त विभाग की घोषित योजना फिलहाल पटरी से उतरती दिखाई दे रही है। राज्य सरकार ने हाल ही में तीन प्रतिशत महंगाई भत्ता बढ़ाने की घोषणा की है, जिसके बाद सातवें वेतनमान के तहत कर्मचारियों को अब कुल 58 प्रतिशत भत्ता मिलेगा जबकि विभागीय प्लान के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक यह दर 64 प्रतिशत तक पहुंचनी थी। इस अंतर के कारण प्रदेश के करीब 12 लाख कर्मचारी और पेंशनर्स को अभी और इंतजार करना पड़ सकता है।

वित्त विभाग घोषित प्लान के मुताबिक 7वें वेतनमान पर 64 प्रतिशत महंगाई भत्ता चालू वित्त वर्ष में नहीं दे पाएगा। ताजा ऐलान के आधार पर महंगाई भत्ता की राशि केंद्र सरकार के निर्णय के 8 माह बाद एमपी के कर्मचारी-अधिकारियों को दी गई है।

जबकि केंद्र में जल्द ही फिर महंगाई भत्ता दिए जाने की कवायद चल रही है। ऐसे में एमपी के कर्मचारियों को नए घोषित होने वाले महंगाई भत्ते की दरों के आधार पर लाभ पाने के लिए इंतजार करना पड़ेगा।

प्रदेश में साढ़े सात लाख नियमित अधिकारी-कर्मचारी और साढ़े चार लाख पेंशनर्स को राज्य सरकार द्वारा महंगाई भत्ता और महंगाई राहत दी जाती है। इस तरह 12 लाख कर्मचारियों अधिकारियों को बढ़ती महंगाई के दौर में 64 प्रतिशत महंगाई भत्ता पाने के लिए 4 से 6 माह तक इंतजार करना पड़ सकता है।

इसकी वजह तीन प्रतिशत बढ़ा हुआ भत्ता अप्रैल के वेतन में मिलने का राज्य सरकार का फैसला माना जा रहा है। अगर केंद्र ने मार्च में महंगाई भत्ता बढ़ा भी दिया तो राज्य सरकार तुरंत इसे नहीं देगी।

यह था वित्त विभाग का प्लान

वित्त विभाग ने जो प्लान तय किया था उसके अनुसार सातवां वेतनमान पाने वाले अधिकारी कर्मचारी को वर्ष 2025-26 में 31 मार्च 2026 तक 64 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिलना है।

इसी तरह वर्ष 2026-27 में 31 मार्च 2027 तक 74 प्रतिशत, वर्ष 2027-28 में 31 मार्च 2028 तक 84 प्रतिशत और इसके बाद वर्ष 2028-29 में मार्च 2029 तक इसे 94 प्रतिशत पहुंचाना है जो सरकार की मौजूदा व्यवस्था के आधार पर गड़बड़ाता नजर आ रहा है।

वित्त विभाग का यह प्लान इसलिए भी मायने रखता है क्योंकि वित्त वर्ष 2028-29 में ही नवंबर-दिसंबर में विधानसभा के चुनाव होना हैं।

एमपी को लाभ मिलने की संभावना कम
प्रदेश में लगभग साढ़े सात लाख नियमित अधिकारी-कर्मचारी और साढ़े चार लाख पेंशनर्स महंगाई भत्ता एवं महंगाई राहत के दायरे में आते हैं। सरकार का तर्क है कि बढ़ा हुआ तीन प्रतिशत भत्ता अप्रैल के वेतन में जोड़ा जाएगा और भुगतान मई से होगा। लेकिन यदि केंद्र सरकार मार्च में फिर से महंगाई भत्ता बढ़ाती है, तो भी राज्य में उसका लाभ तुरंत मिलने की संभावना कम है। पिछली बार भी केंद्र के फैसले के करीब आठ महीने बाद राज्य कर्मचारियों को संशोधित दर का लाभ मिला था।

प्लान के विपरीत अभी यह है मौजूदा स्थिति

रोलिंग बजट की कवायद के बीच राज्य सरकार ने 6 माह पहले यह कहा था कि 2026-27 के बजट के पहले महंगाई भत्ते की राशि को सरकार 64 प्रतिशत तक पहुंचाएगी लेकिन इस पर अमल नहीं हुआ। 8 माह के अंतराल के बाद दिए गए महंगाई भत्ते की असलियत यह है कि यह 55 फीसदी से बढ़कर 58 फीसदी ही हुआ है।

इसका भुगतान भी सरकार कर्मचारियों को अप्रैल के वेतन से मई माह से करेगी। सरकार के प्लान के चलते कर्मचारी नेता यह मानकर चल रहे थे कि 2025 की दिवाली और फिर 2026 में फरवरी-मार्च में सरकार दो से तीन किस्तों में महंगाई भत्ता बढ़ाकर इसे 31 मार्च के पहले 64 प्रतिशत तक पहुंचा देगी।

5वें और 6वें वेतनमान वालों के लिए यह बताई थी प्लानिंग

वित्त विभाग ने महंगाई भत्ते को लेकर जारी प्लानिंग में 6 माह पहले कहा था कि जिन विभागों में 6वें या 5वें वेतनमान पाने वाले कर्मचारी हैं, उन्हें भी हर साल 10 फीसदी महंगाई भत्ता बढ़ाकर दिया जाएगा। छठवें वेतनमान में वर्तमान में 252% तक महंगाई भत्ता दिया जाता है जो मुख्यमंत्री द्वारा होली के मौके पर की गई घोषणा के बाद 255 प्रतिशत हो जाएगा।

आगामी वर्षों को लेकर सरकार की प्लानिंग यह है कि वर्ष 2026-27 में 265 प्रतिशत, वर्ष 2027-28 में 280 और वर्ष 2028-29 में 295 प्रतिशत महंगाई भत्ता दिया जाएगा। इसके हिसाब से विभागों को रोलिंग बजट में प्रावधान करना होगा। प्रदेश सरकार के उपक्रम, निगम, मंडल में काम करने वाले कर्मचारियों को भी इसी तर्ज पर महंगाई भत्ता दिया जाना है।

इसी तरह शासन में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत पांचवें वेतनमान प्राप्त कर्मचारियों को वर्तमान में 315% के मान से मंहगाई भत्ता दिया जाना है। हालांकि सातवें वेतनमान की तरह यह स्थिति अभी लागू नहीं हो पाई है। इसके आधार पर जो प्लान तय किया है उसके मुताबिक वर्ष 2026-27 में 325 प्रतिशत, वर्ष 2027-28 में 335 और वर्ष 2028-29 में 345 प्रतिशत के हिसाब से बजट प्रावधान किया जाएगा।

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